राजस्थान पत्रिका में 'MatruBhasha: माँ'
5 नवम्बर 2009 को राजस्थान पत्रिका, जयपुर संस्करण के नियमित स्तंभ 'ब्लॉग चंक' में MatruBhasha: माँ की एक कविता
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5 नवम्बर 2009 को राजस्थान पत्रिका, जयपुर संस्करण के नियमित स्तंभ 'ब्लॉग चंक' में MatruBhasha: माँ की एक कविता
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2 comments:
धीरे धीरे मुरझाती और घीसती माँ
नए पौधौ को व्रक्ष बनाती माँ
तभी तो माँ है .. अच्छी कविता .आभार
mere pannon pe aapki maa aayee hai.. bahut acchha laga
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